उन्नाव में 150 स्कूली वाहन अनफिट, बच्चों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा

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एआरटीओ ने जांच और कार्रवाई के दिए निर्देश, अनफिट वाहन चलने पर होगी कड़ी कार्रवाई

ब्यूरो उमेश शुक्ला

(लखनऊ सुपरफ़ास्ट) उन्नाव जनपद में आम जनमानस के साथ साथ अब स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जनपद में पंजीकृत सैकड़ों स्कूली वाहनों में से करीब 150 वाहन ऐसे हैं जिनकी फिटनेस फेल हो चुकी है, लेकिन अभी तक उन्हें स्क्रैप नहीं कराया गया है। ऐसे वाहनों के कारण बच्चों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
जनपद में लगभग पांच सौ से अधिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों के बच्चों को लाने-ले जाने के लिए कुल 838 स्कूली वाहन परिवहन विभाग में पंजीकृत हैं। नियमानुसार इन सभी वाहनों को समय-समय पर फिटनेस जांच से गुजरना और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इनमें से करीब 150 वाहनों की फिटनेस जांच में फेल हो चुकी है, जबकि उनकी आयु अभी 15 वर्ष से कम है। इसका मतलब है कि तकनीकी रूप से ये वाहन सड़क पर चलने योग्य नहीं हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन वाहनों की फिटनेस फेल है, उन्हें फिलहाल स्कूलों द्वारा संचालित नहीं किया जा रहा है। हालांकि यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर ये वाहन उपयोग में नहीं हैं तो इन्हें अब तक स्क्रैप क्यों नहीं कराया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वाहन कभी भी नियमों को नजरअंदाज कर दोबारा सड़कों पर उतर सकते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।

स्कूलों से मांगी जाएगी जानकारी

इस मामले में एआरटीओ प्रवर्तन संजीव कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे करीब 150 वाहनों की पहचान की गई है जिनकी फिटनेस फेल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सभी स्कूल संचालकों से संपर्क कर इन वाहनों की वर्तमान स्थिति की जांच कराई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो वाहन फिटनेस मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनका चेसिस नंबर जमा कराकर उन्हें स्क्रैप कराया जाएगा।
अनफिट वाहन चलने पर दर्ज होगा मुकदमा
एआरटीओ ने चेतावनी दी कि यदि कोई भी अनफिट स्कूली वाहन सड़क पर चलता हुआ पाया गया तो संबंधित स्कूल प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर जनपद में ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार डंपरों पर भी प्रशासन लगाम नहीं लगा पा रहा है। हाईवे और मुख्य मार्गों पर दिन-रात दौड़ रहे डंपर अक्सर यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ये डंपर अत्यधिक गति और ओवरलोडिंग के चलते हादसों का कारण बनते हैं, जिससे आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों की भी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

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