सुभाष यादव
वाराणसी। शुक्रवार को नव संवत्सर के शुभ संकल्प के रूप में भारतीय संस्कृति विशेषकर काशिकेय संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन के उद्देश्य से प्रदर्श कलाओं और कला साधकों को परिष्कृत करने की मंडलायुक्त एस राजलिंगम की संकल्पना को मूर्त रूप प्रदान करने की पहल रविदास पार्क के प्रांगण आनंद कानन कला गुरुकुल नाम से की गई ।जिसके अंतर्गत प्रदर्श कलाओं से संबंधित समस्त विधाओं का प्रशिक्षण नियमित रूप से गुरु शिष्य परंपरा पर आधारित शैली मे प्रदान किया जाएगा। विशेष रूप से कलाकारों को प्रशिक्षित कर उन्हें विभिन्न मंचों पर अवसर प्रदान किए जाएंगे।
नव संवत्सर के अवसर में5 प्रशिक्षण कार्य का शुभारंभ गोधूली बेला में प्रारंभ किया गया। सर्वप्रथम जवाहर लाल की शहनाई से मंगल ध्वनि और गंगा द्वारे बधाईया बाजे से मां गंगा आह्वाहन के साथ हुआ।

इस अवसर पर सर्व प्रथम वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की उपाध्यक्ष पूर्णा बोरा द्वारा उपस्थित गुरुजन एवं कलाकार डॉ मंगला कपूर, जवाहर लाल, डॉ राजेश शाह,डॉ रविंद्र गोस्वामी, डॉ विजय कपूर, डॉ दिव्या श्रीवास्तव, डॉ रागिनी सरना को बुके एवं माल्यार्पण के माध्यम से स्वागत सम्मान किया गया। आनंद कानन कला गुरुकुल के संचालन का दायित्व निर्वहन सुबह-ए-बनारस आनंद कानन द्वारा वाराणसी विकास प्राधिकरण के संरक्षण में लिया जाएगा।कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन पूर्णा बोरा द्वारा, विषयस्थापन एवं उद्देश्य से अवगत कराया डॉ रत्नेश वर्मा संस्थापक एवं सचिव सुबह-ए-बनारस तथा धन्यवाद ज्ञापन किया डॉ वीरेंद्र सिंह ने।कार्यक्रम का संचालन मनीष खत्री द्वारा किया गया।इस अवसर पर अभय श्रीवास्तव, कौशल शर्मा आदि के साथ विभिन्न विधा के कलाकार एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।